Parvati Panchakam — Hindi Lyrics
विनोदमोदमोदिता दयोदयोज्ज्वलन्तर। निशुम्भशुम्भदम्भदरणे सुदरुनरुण। अखण्डगन्धदण्डमुण्ड-मण्डलिविमण्डित। प्रचण्डचन्दरश्मिरश्मि-रशिशोभित शिव॥
विनोदमोदमोदिता दयोदयोज्ज्वलंतर। निशुंभशुंभदंभदरणे सुदरुनरुण। अखंडगंधदंडमुंड-मंडलिविमंडित। प्रचंडचंदरश्मिरश्मि-रशिशोभित शिव॥
पार्वती अपनी आनंद और करुणा की ज्योति से विश्व को प्रकाशित करती हैं और शिव के साथ सर्वोच्च शक्ति को धारण करती हैं।
अमन्दनन्दिनन्दिनी धरधरेन्द्रनन्दिनी। प्रतिर्नशिर्नतरिणी सदार्यकार्यकारिणी। तदन्धकान्तकान्तक-प्रियेशकान्तकान्तक। मुरारिकामचरिकाम-मरिधरिणी शिव॥
अमंदनंदिनंदिनी धरधरेंद्रनंदिनी। प्रतिर्नशिर्नतरिणी सदार्यकार्यकारिणी। तदंधकांतकांतक-प्रियेशकांतकांतक। मुरारिकामचरिकाम-मरिधरिणी शिव॥
माता पार्वती विष्णु और इंद्र की भी प्रिय हैं तथा सभी देवताओं को संतोष और आनंद प्रदान करती हैं।
अशेषवेषशून्यदेश-भर्त्रिकेशशोभित। गणेशदेवतेषशेष-निर्निमेषविक्षित। जितास्वशिञ्जितलि-कुञ्जपुञ्जमञ्जुगुञ्जित। समस्तमस्तकस्थित निरस्तकामकास्तव॥
अशेषवेषशून्यदेश-भर्त्रिकेशशोभित। गणेशदेवतेषशेष-निर्निमेषविक्षित। जितास्वशिंजितलि-कुंजपुंजमंजुगुंजित। समस्तमस्तकस्थित निरस्तकामकास्तव॥
पार्वती गणेश के साथ विराजमान हैं और सभी आकाशीय संगीत तथा दिव्य सुगंध से परिपूर्ण हैं।
ससम्भ्रमम् भ्रमम् भ्रमम् भ्रमन्ति मूढमानव। मूढबुधः सुधम् विहाय धवमानमनसः। अधिनादिनहिनवरि-हिनामिनजीवन। ददतु शम्प्रदनिशम् वशम्वदर्थमाशिषम्॥
ससंभ्रमम् भ्रमम् भ्रमम् भ्रमंति मूढमानव। मूढबुधः सुधम् विहाय धवमानमनसः। अधिनादिनहिनवरि-हिनामिनजीवन। ददतु शम्प्रदनिशम् वशम्वदर्थमाशिषम्॥
मोहित मनुष्य भटकते हैं, किंतु पार्वती की कृपा से उन्हें मुक्ति और शांति मिलती है।
विलोललोचनञ्चि-तोचितैश्चित सदा गुणै- रपश्यदास्यमेवमस्य-हस्यलस्यकारिणी। निराश्रयाश्रयाश्रयेश्वरी सदा वरीयसी। करोतु शम् शिवनिशम् हि शङ्करङ्कशोभिनी॥
विलोललोचनंचि-तोचितैश्चित सदा गुणै- रपश्यदास्यमेवमस्य-हस्यलस्यकारिणी। निराश्रयाश्रयाश्रयेश्वरी सदा वरीयसी। करोतु शम् शिवनिशम् हि शंकरंकशोभिनी॥
पार्वती की दिव्य दृष्टि और कृपा से सभी को सुख, शांति और मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।