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Shiva Mantra

Shiva Prataha Mantra — Hindi Lyrics

प्रातः स्मरामि भव भीति हरं सुरेशं। गंगाधरं वृषभवाहनं अम्बिकेशम्।

प्रातः स्मरामि भव भीति हरं सुरेशं। गंगाधरं वृषभवाहनं अंबिकेशम्।

मैं प्रातःकाल शिव को स्मरण करता हूँ जो भवभीति को हरते हैं, गंगाधर हैं, वृषभ को वाहन मानते हैं और अंबिका के ईश्वर हैं।

खट्ट्वाङ्ग शूल वरद अभय हस्तमिशं। संसार रोग हरं औषधम् अद्वितीयम्।

खट्टवांग शूल वरद अभय हस्तमिशं। संसार रोग हरं औषधम् अद्वितीयम्।

खट्टवांग और शूल धारण करते हुए वरदान और अभय मुद्रा देते हैं, संसार के रोग को हरते हैं और अद्वितीय औषधि हैं।

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