Dakshina Lakshmi Stotram — Hindi Lyrics
त्रिलोक्य पूजिते देवी कमलाविष्णु वल्लभे।
त्रिलोक्य पूजिते देवी कमलाविष्णु वल्लभे।
हे देवी, तीनों लोकों में पूजी जाने वाली, कमल की देवी, विष्णु की प्रिय पत्नी लक्ष्मी को नमस्कार है।
यया त्वम् अचला कृष्णे तथाभव मयी स्थिरा॥
या त्वम् अचला कृष्णे तथाभव मई स्थिरा॥
हे कृष्ण की प्रिय, जैसे आप अचल हैं, वैसे ही मुझ में स्थिरता लाइए।
कमलचञ्चल लक्ष्मी चला भूतिर् हरि प्रिया।
कमलचंचल लक्ष्मी चला भूतिर् हरि प्रिया।
कमल पर चंचल लक्ष्मी, विष्णु की प्रिय, चंचल संपत्ति को नमस्कार है।
पद्म पद्मालयां सम्यक् उच्चै श्री पद्मधारिणी॥
पद्म पद्मालया समक् उच्चै श्री पद्मधारिणी॥
पद्म के आसन पर विराजमान, शुद्ध और श्रेष्ठ, कमल धारण करने वाली श्री लक्ष्मी को नमस्कार है।
द्वादशैतानि नामानि लक्ष्मी सम्पूज्य यः पठेत्।
द्वादशैतानि नामानि लक्ष्मी संपूज्य यः पठेत्।
जो व्यक्ति लक्ष्मी के इन बारह नामों को श्रद्धापूर्वक पढ़ते हैं।
स्थिरा लक्ष्मिर् भवेद् तस्य पुत्रधरा अभि सह।
स्थिरा लक्ष्मिर् भवेद् तस्य पुत्रधरा अभि सह।
उनके पास स्थिर लक्ष्मी आती है और उनके पास संतान भी रहती है।
इति श्री दक्षिणा लक्ष्मी स्तोत्रं सम्पूर्णम्॥
इति श्री दक्षिणा लक्ष्मी स्तोत्रं संपूर्णम्॥
यह श्री दक्षिणा लक्ष्मी स्तोत्र पूर्ण हुआ।